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Sunday, 13 December 2015

उत्तराखण्ड (पूर्व नाम उत्तरांचल ), उत्तर भारत में स्थित एक राज्य है जिसका निर्माण ९ नवम्बर २००० को कई वर्षों के आन्दोलन के पश्चात[3] भारत गणराज्य के सत्ताइसवें राज्य के रूप में किया गया था। सन २००० से २००६ तक यह उत्तराञ्चल के नाम से जाना जाता था। जनवरी २००७ में स्थानीय लोगों की भावनाओं को ध्यान में रखते हुए राज्य का आधिकारिक नाम बदलकर उत्तराखण्ड कर दिया गया। [4] राज्य की सीमाएँ उत्तर में तिब्बत और पूर्व में नेपाल से लगी हैं। पश्चिम में हिमाचल प्रदेश और दक्षिण में उत्तर प्रदेश इसकी सीमा से लगे राज्य हैं। सन २००० में अपने गठन से पूर्व यह उत्तर प्रदेश का एक भाग था। पारम्परिक हिन्दू ग्रन्थों और प्राचीन साहित्य में इस क्षेत्र का उल्लेख उत्तराखण्ड के रूप में किया गया है। हिन्दी और संस्कृत में उत्तराखण्ड का अर्थ उत्तरी क्षेत्र या भाग होता है। राज्य में हिन्दू धर्म की पवित्रतम और भारत की सबसे बड़ी नदियों गंगा और यमुना के उद्गम स्थल क्रमशः गंगोत्री और यमुनोत्री तथा इनके तटों पर बसे वैदिक संस्कृति के कई महत्त्वपूर्ण तीर्थस्थान हैं। देहरादून, उत्तराखण्ड की अन्तरिम राजधानी होने के साथ इस राज्य का सबसे बड़ा नगर है। गैरसैण नामक एक छोटे से कस्बे को इसकी भौगोलिक स्थिति को देखते हुए भविष्य की राजधानी के रूप में प्रस्तावित किया गया है किन्तु विवादों और संसाधनों के अभाव के चलते अभी भी देहरादून अस्थाई राजधानी बना हुआ है। [5][6] राज्य का उच्च न्यायालय नैनीताल में है। राज्य सरकार ने हाल ही में हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों को बढ़ावा देने के लिये कुछ पहल की हैं। साथ ही बढ़ते पर्यटन व्यापार तथा उच्च तकनीकी वाले उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए आकर्षक कर योजनायें प्रस्तुत की हैं। राज्य में कुछ विवादास्पद किन्तु वृहत बाँध परियोजनाएँ भी हैं जिनकी पूरे देश में कई बार आलोचनाएँ भी की जाती रही हैं, जिनमें विशेष है भागीरथी-भीलांगना नदियों पर बनने वाली टिहरी बाँध परियोजना । इस परियोजना की कल्पना १९५३ मे की गई थी और यह अन्ततः २००७ में बनकर तैयार हुआ। उत्तराखण्ड, चिपको आन्दोलन के जन्मस्थान के नाम से भी जाना जाता है। [7] इतिहास मुख्य लेख : उत्तराखण्ड का इतिहास यह भी पढ़ें: उत्तराखण्ड राज्य आन्दोलन, रामपुर तिराहा गोली काण्ड , श्रीनगर, गढ़वाल का इतिहास, उत्तराखंड में स्वाधीनता संग्राम स्कन्द पुराण में हिमालय को पाँच भौगोलिक क्षेत्रों में विभक्त किया गया है:- “ खण्डाः पञ्च हिमालयस्य कथिताः नैपालकूमाँचंलौ। केदारोऽथ जालन्धरोऽथ रूचिर काश्मीर संज्ञोऽन्तिमः॥ ” अर्थात हिमालय क्षेत्र में नेपाल, कुर्मांचल ( कुमाऊँ ), केदारखण्ड ( गढ़वाल), जालन्धर ( हिमाचल प्रदेश ) और सुरम्य कश्मीर पाँच खण्ड है। [8] पौराणिक ग्रन्थों में कुर्मांचल क्षेत्र मानसखण्ड के नाम से प्रसिद्व था। पौराणिक ग्रन्थों में उत्तरी हिमालय में सिद्ध गन्धर्व , यक्ष , किन्नर जातियों की सृष्टि और इस सृष्टि का राजा कुबेर बताया गया हैं। कुबेर की राजधानी अलकापुरी ( बद्रीनाथ से ऊपर) बताई जाती है। पुराणों के अनुसार राजा कुबेर के राज्य में आश्रम में ऋषि-मुनि तप व साधना करते थे। अंग्रेज़ इतिहासकारों के अनुसार हुण, सकास, नाग, खश आदि जातियाँ भी हिमालय क्षेत्र में निवास करती थी। पौराणिक ग्रन्थों में केदार खण्ड व मानस खण्ड के नाम से इस क्षेत्र का व्यापक उल्लेख है। इस क्षेत्र को देव- भूमि व तपोभूमि माना गया है। मानस खण्ड का कुर्मांचल व कुमाऊँ नाम चन्द राजाओं के शासन काल में प्रचलित हुआ। कुर्मांचल पर चन्द राजाओं का शासन कत्यूरियों के बाद प्रारम्भ होकर सन १७९० तक रहा। सन १७९० में नेपाल की गोरखा सेना ने कुमाऊँ पर आक्रमण कर कुमाऊँ राज्य को अपने आधीन कर लिया। गोरखाओं का कुमाऊँ पर सन १७९० से १८१५ तक शासन रहा। सन १८१५ में अंग्रेंजो से अन्तिम बार परास्त होने के उपरान्त गोरखा सेना नेपाल वापस चली गई किन्तु अंग्रेजों ने कुमाऊँ का शासन चन्द राजाओं को न देकर ईस्ट इण्डिया कम्पनी के अधीन कर दिया। इस प्रकार कुमाऊँ पर अंग्रेजो का शासन १८१५ से आरम्भ हुआ। संयुक्त प्रांत का भाग उत्तराखण्ड, १९०३ ऐतिहासिक विवरणों के अनुसार केदार खण्ड कई गढ़ों (किले) में विभक्त था। इन गढ़ों के अलग-अलग राजा थे जिनका अपना-अपना आधिपत्य क्षेत्र था। इतिहासकारों के अनुसार पँवार वंश के राजा ने इन गढ़ों को अपने अधीनकर एकीकृत गढ़वाल राज्य की स्थापना की और श्रीनगर को अपनी राजधानी बनाया। केदार खण्ड का गढ़वाल नाम तभी प्रचलित हुआ। सन १८०३ में नेपाल की गोरखा सेना ने गढ़वाल राज्य पर आक्रमण कर अपने अधीन कर लिया। यह आक्रमण लोकजन में गोरखाली के नाम से प्रसिद्ध है। महाराजा गढ़वाल ने नेपाल की गोरखा सेना के अधिपत्य से राज्य को मुक्त कराने के लिए अंग्रेजो से सहायता मांगी। अंग्रेज़ सेना






उत्तराखंड, उत्तर भारत में स्थित एक बहुत ही
खूबसूरत और शांत पर्यटन केंद्र है । इस जगह का शुमार देश
की उन चुनिन्दा जगहों में है जोअपनी
सुन्दरता के चलते दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी
ओर आकर्षित करती है। 'देवताओं की


भूमि' के रूप में जाना जाने वाला उत्तराखंड अपने शांत वातावरण,

मनमोहक दृश्यों और खूबसूरती के कारण

पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है।
सोशल नेटवर्क पर इसे शेयर करें
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इस खूबसूरत राज्य के उत्तर में जहाँ तिब्बत है वहीँ
इसके पूरब में नेपाल देश है। जबकि इसके दक्षिण में उत्तर
प्रदेश और उत्तर पश्चिम में हिमाचल प्रदेश है। इस राज्य का
मूल नाम उत्तरांचल था जिसे बदलकर जनवरी 2007
में उत्तराखंड कर दिया गया था। राज्य में कुल 13 जिलें हैं जिन्हें
प्रमुख डिवीजनों, कुमाऊं और गढ़वाल के आधार पर बांटा
गया है।
जलवायु
उत्तराखंड राज्य तीन प्रमुख मौसमों का अनुभव करता
है जिनमें गर्मी, मॉनसून और सर्दी शामिल
हैं। यहाँ की जलवायु बहुत हद तक यहाँ
की भौगोलिक परिस्थितियों पर भी निर्भर
करती है। यहाँ जहाँ एक तरफ विशाल पहाड़ियां हैं
वहीँ दूसरी तरफ छोटे प्लेन
भी है । उत्तराखंड की यात्रा का सबसे
अच्छा समय गर्मियों का मौसम है इस समय यहाँ का मौसम बहुत
ही अच्छा रहता है। उत्तराखंड आने वाले पर्यटक
अपनी यात्रा को सर्दियों में भी प्लान कर
सकते हैं। हालांकि भीषण बर्फ़बारी के
चलते कुछ स्थानों पर आने वाले पर्यटक नहीं जा
सकते हैं फिर भी अगर आप चाहें तो इस मौसम में
भी उत्तराखंड की यात्रा की
जा सकती है।
भाषाएँ
उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा हिन्दी है,
लेकिन यह विभिन्न बोलियों में विविध क्षेत्रों में बोली
जाती हैं। कुमाऊंनी और
गढ़वाली यहाँ ज़्यादातर बोली
जाती है। इसके अलावा, पहाड़ी
बोली भी कुछ क्षेत्रों में लोकप्रिय है।
'कुमाऊं' व्यापक श्रेणी के तहत, लोकप्रिय उप बोलियाँ
हैं - जोहरी, दानपुरिया, अस्कोटी,
सिराली, गंगोला, खास्पर्जिया, फल्दाकोती,
पच्चायी, रौचौभैसी, माझ कुमैया,
सोरयाली, चौघरख्याली और कुमैया।
गढ़वाली बोली की उप श्रेणियों
में जौनसारी, सैलानी और मर्ची
शामिल हैं। यहाँ की प्रमुख बोलियां संस्कृत,
केंद्रीय पहाड़ी, और सौरसेनी
प्राकृत से प्रभावित हैं और ये भाषाएँ देवनागरी लिपि में
लिखी जाती हैं।
उत्तराखंड में पर्यटन
उत्तराखंड के 13 खूबसूरत जिलों में अनेक पर्यटक स्थल हैं नए
स्थलों की खोज के साथ यहाँ की
सूची बढती ही जा
रही है। पूजा से ट्रैकिंग तक, हर स्थल अपने में
अलग अहमियत रखता है । यहाँ अनेक तीर्थस्थल
मौजूद हैं और यहाँ की खूबसूरत वादियाँ यात्रियों के लिए
रोमांचक गतिविधियों की एक विशाल रेंज प्रदान
करती है।
उत्तराखंड के झीलों के जिले के रूप में जाना जानेवाला,
नैनीताल एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो
की समुद्र तल से 1938 मीटर
की ऊंचाई पर बसा है। स्वर्ग का यह टुकड़ा अंग्रेजों
द्वारा वर्ष 1841 में खोजा गया था और एक हॉलिडे रिसोर्ट में बदल
दिया गया। शब्द 'नैनी' हिंदू देवी
नैनी के नाम से पड़ा,जिनका मंदिर झील के
किनारे स्थित है।
नैनीताल आगंतुकों को नौका विहार, नौकायन और
मछली पकड़ने के अवसर प्रदान करता है।
नैनीताल के विभिन्न खूबसूरत पर्यटक स्थल दुनिया भर
से पर्यटकों की एक बड़ी संख्या
कोअपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन स्थानों में
हनुमानगढ़ी, खुरपाताल, किलबरी,लारिअकंता,
और लैंसडाउन शामिल हैं।
इसके अलावा इन स्थानों से नैनी पीक, स्नो
व्यू , नैनीताल रोपवे, भीमताल, नौकुचियाताल,
और सात ताल नैनीताल के पास के स्थल हैं जो
अपनी सुंदरता के लिए जाने जाते है। 'पहाड़ियों
की रानी' मसूरी देखने लायक
जगह है। इसकी खूबसूरत हरी
भरी पहाड़ियां और शक्तिशाली हिमालय
की बर्फ से ढकी पर्वतमाला दून
घाटी जो की दक्षिणी दिशा में
स्थित है, का एक मनोरम दृश्य प्रदान करते हैं।
यमुना ब्रिज, नाग टिब्बा, धनौल्टी , और सुरखंडा
देवी मसूरीके आस पास के पर्यटक स्थल
हैं। कौसानी कत्युरी घाटी ,
गोमती नदी और पंचचुली
की बर्फीली चोटियों, नंदा कोट,
नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखम्बा और
केदारनाथ के लुभावने दृश्य प्रदान करता है। अनासक्ति आश्रम,
पंत संग्रहालय, और लक्ष्मी आश्रम भी
पर्यटकों में लोकप्रिय हैं।
कौसानी कत्युरी घाटी ,
गोमती नदी और पंचचुली
की बर्फीली चोटियों, नंदा कोट,
नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखम्बा और
केदारनाथ के लुभावने दृश्य प्रदान करता है। अनासक्ति आश्रम,
पंत संग्रहालय, और लक्ष्मी आश्रम भी
पर्यटकों में लोकप्रिय हैं।
अपने प्राकृतिक सौंदर्य और एक विविध वन्य जीवन
के लिए जाने जानेवाले जगहों में, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क ,
राजाजी नेशनल पार्क, केदारनाथ अभयारण्य, गोविंद
वन्यजीव अभयारण्य, बिनसर वन्य जीव
अभयारण्य, आस्सन बैराज पक्षी अभयारण्य, नंदा
देवी राष्ट्रीय पार्क, और अस्कोट
वन्यजीव अभयारण्य जैसी जगहें

Devbhoomi Uttarakhandउत्तराखंड, उत्तर भारत में स्थित एक बहुत ही खूबसूरत और शांत पर्यटन केंद्र है । इस जगह का शुमार देश की उन चुनिन्दा जगहों में है जोअपनी सुन्दरता के चलते दुनिया भर के पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। 'देवताओं की भूमि' के रूप में जाना जाने वाला उत्तराखंड अपने शांत वातावरण, मनमोहक दृश्यों और खूबसूरती के कारण पृथ्वी का स्वर्ग माना जाता है। सोशल नेटवर्क पर इसे शेयर करें शेयर करें ट्वीट करें टशेयर करें इस खूबसूरत राज्य के उत्तर में जहाँ तिब्बत है वहीँ इसके पूरब में नेपाल देश है। जबकि इसके दक्षिण में उत्तर प्रदेश और उत्तर पश्चिम में हिमाचल प्रदेश है। इस राज्य का मूल नाम उत्तरांचल था जिसे बदलकर जनवरी 2007 में उत्तराखंड कर दिया गया था। राज्य में कुल 13 जिलें हैं जिन्हें प्रमुख डिवीजनों, कुमाऊं और गढ़वाल के आधार पर बांटा गया है। जलवायु उत्तराखंड राज्य तीन प्रमुख मौसमों का अनुभव करता है जिनमें गर्मी, मॉनसून और सर्दी शामिल हैं। यहाँ की जलवायु बहुत हद तक यहाँ की भौगोलिक परिस्थितियों पर भी निर्भर करती है। यहाँ जहाँ एक तरफ विशाल पहाड़ियां हैं वहीँ दूसरी तरफ छोटे प्लेन भी है । उत्तराखंड की यात्रा का सबसे अच्छा समय गर्मियों का मौसम है इस समय यहाँ का मौसम बहुत ही अच्छा रहता है। उत्तराखंड आने वाले पर्यटक अपनी यात्रा को सर्दियों में भी प्लान कर सकते हैं। हालांकि भीषण बर्फ़बारी के चलते कुछ स्थानों पर आने वाले पर्यटक नहीं जा सकते हैं फिर भी अगर आप चाहें तो इस मौसम में भी उत्तराखंड की यात्रा की जा सकती है। भाषाएँ उत्तराखंड की आधिकारिक भाषा हिन्दी है, लेकिन यह विभिन्न बोलियों में विविध क्षेत्रों में बोली जाती हैं। कुमाऊंनी और गढ़वाली यहाँ ज़्यादातर बोली जाती है। इसके अलावा, पहाड़ी बोली भी कुछ क्षेत्रों में लोकप्रिय है। 'कुमाऊं' व्यापक श्रेणी के तहत, लोकप्रिय उप बोलियाँ हैं - जोहरी, दानपुरिया, अस्कोटी, सिराली, गंगोला, खास्पर्जिया, फल्दाकोती, पच्चायी, रौचौभैसी, माझ कुमैया, सोरयाली, चौघरख्याली और कुमैया। गढ़वाली बोली की उप श्रेणियों में जौनसारी, सैलानी और मर्ची शामिल हैं। यहाँ की प्रमुख बोलियां संस्कृत, केंद्रीय पहाड़ी, और सौरसेनी प्राकृत से प्रभावित हैं और ये भाषाएँ देवनागरी लिपि में लिखी जाती हैं। उत्तराखंड में पर्यटन उत्तराखंड के 13 खूबसूरत जिलों में अनेक पर्यटक स्थल हैं नए स्थलों की खोज के साथ यहाँ की सूची बढती ही जा रही है। पूजा से ट्रैकिंग तक, हर स्थल अपने में अलग अहमियत रखता है । यहाँ अनेक तीर्थस्थल मौजूद हैं और यहाँ की खूबसूरत वादियाँ यात्रियों के लिए रोमांचक गतिविधियों की एक विशाल रेंज प्रदान करती है। उत्तराखंड के झीलों के जिले के रूप में जाना जानेवाला, नैनीताल एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है जो की समुद्र तल से 1938 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। स्वर्ग का यह टुकड़ा अंग्रेजों द्वारा वर्ष 1841 में खोजा गया था और एक हॉलिडे रिसोर्ट में बदल दिया गया। शब्द 'नैनी' हिंदू देवी नैनी के नाम से पड़ा,जिनका मंदिर झील के किनारे स्थित है। नैनीताल आगंतुकों को नौका विहार, नौकायन और मछली पकड़ने के अवसर प्रदान करता है। नैनीताल के विभिन्न खूबसूरत पर्यटक स्थल दुनिया भर से पर्यटकों की एक बड़ी संख्या कोअपनी ओर आकर्षित करते हैं। इन स्थानों में हनुमानगढ़ी, खुरपाताल, किलबरी,लारिअकंता, और लैंसडाउन शामिल हैं। इसके अलावा इन स्थानों से नैनी पीक, स्नो व्यू , नैनीताल रोपवे, भीमताल, नौकुचियाताल, और सात ताल नैनीताल के पास के स्थल हैं जो अपनी सुंदरता के लिए जाने जाते है। 'पहाड़ियों की रानी' मसूरी देखने लायक जगह है। इसकी खूबसूरत हरी भरी पहाड़ियां और शक्तिशाली हिमालय की बर्फ से ढकी पर्वतमाला दून घाटी जो की दक्षिणी दिशा में स्थित है, का एक मनोरम दृश्य प्रदान करते हैं। यमुना ब्रिज, नाग टिब्बा, धनौल्टी , और सुरखंडा देवी मसूरीके आस पास के पर्यटक स्थल हैं। कौसानी कत्युरी घाटी , गोमती नदी और पंचचुली की बर्फीली चोटियों, नंदा कोट, नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखम्बा और केदारनाथ के लुभावने दृश्य प्रदान करता है। अनासक्ति आश्रम, पंत संग्रहालय, और लक्ष्मी आश्रम भी पर्यटकों में लोकप्रिय हैं। कौसानी कत्युरी घाटी , गोमती नदी और पंचचुली की बर्फीली चोटियों, नंदा कोट, नंदा देवी, त्रिशूल, नंदा घुंटी, चौखम्बा और केदारनाथ के लुभावने दृश्य प्रदान करता है। अनासक्ति आश्रम, पंत संग्रहालय, और लक्ष्मी आश्रम भी पर्यटकों में लोकप्रिय हैं। अपने प्राकृतिक सौंदर्य और एक विविध वन्य जीवन के लिए जाने जानेवाले जगहों में, जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क , राजाजी नेशनल पार्क, केदारनाथ अभयारण्य, गोविंद वन्यजीव अभयारण्य, बिनसर वन्य जीव अभयारण्य, आस्सन बैराज पक्षी अभयारण्य, नंदा देवी राष्ट्रीय पार्क, और अस्कोट वन्यजीव अभयारण्य जैसी जगहें श


Gkये लो सामान्य ज्ञान का खजाना ====================== 1. Pahli Rajasthani film kon si thi Najrani 2. CBSE ka Mukhyalaya kahan par hai New Delhi 3. Rajya Sabha ke sadhsyon ka karyakaal kitna hota hai chhah (Six) saal 4. Anandmath ke rachayita kon hai Bakim Chandra 5. Bharat ki sabse purani Oil refinery kahan par hai Assam 6. Mistr me neel nadi par kon sa baandh hai Aaswaan baandh 7. National Indian Military College kahan par stith hai Dehradun 8. Babarnama kis bhasha me likha gya hai Turkey 9. Hamir Mahakavya ke rachyita kon hai Nayanchandra Suri 10. Rashtriya Anusuchit Jaati Aayog ke Adhyaksh kon hai P. L. Puniya 11. Pakistan ka Rashtriya Khel kon sa hai Hockey 12. Bharat ka pahla Nobel Puraskaar kise mila Ravindernath Tagore 13. Bharat me pahli Metro train kab shuru hui 1984 me 14. Duniya ka sabse bada jawalamukhi kahan hai America ke Unoston prant ke National park me 15. Bharat me pahli baar radio karyakaram kab aur kiske dwara parstut kiya gaya 1923 me Bombay ke Radio Club dwara 16. Bharatiya Savidhan me kul kitne Anuched hai 395 Anuchhed 17. Shekhawati ka Gandhi kise kaha jata hai Badrinarayan Sodani ko 18. Liltaas pustak ke rachayita kon hai Kanheya Lal Sethiya 19. Rajya Sabha ka Sabhapati kon hota hai UpRashtrapati 20. Duniya ka sabse bada rail junction kahan par hai Shikago 21. Bharat ka Sabse bada Koyla Shetr kon sa hai Jhariya 22. Bharat me Magrov vanaspati vistrit roop me kahan payi jati hai Sundarvan 23. Neel Nadi kon si jheel se nikalti hai Victoriya 24. Vishv me joot utpadan me agrani desh kon sa hai Bangladesh 25. Bharat ka pahla jaiv mandal arkshit shetr kon sa hai Neelgiri 26. Pahla Yash Chopra memorial puraskar kise diya gaya Lata Mangeshkar 27. Pustak “My Brief History” kiske dwara Likhi gayi hai Stiphen Hakins 28. Navneet Kaur Aur Rani Rajpal ka sambandh kis khel se hai Hockey se 29. Insulin ki khoj kisne ki thi F. T. Benting 30. Netradaan me aankh ka kon sa bhaag paryukt kiya jata hai Cornia 31. Delhi ki parsidh Jama Masjid ka nirmaan kisne karvaya tha Shahjahan ne 32. Ek Rupay ke note par kiske hastakshar hote hai Vit Sachiv, Bharat sarkar 33. Bharat me yojna aayog ka gathan kab hua March 1950 34. Jaliawala Baagh kahan par stith hai Amritsar, Punjab 35. Maanavadhikar diwas kab manaya jata hai 10 December 36. Protin kis se banti hai Amino Amal se 37. Bengal ka vibhajan kab hua 15 November 1950 ko 38. Bharat me sarv-partham Patra mudra ka chalan kab hua 1806 me 39. Antarashtriya Nyayalya kahan stith hai Heg me 40. Computer me memory ki sabse chhoti ikaai kya hai Byte 41. Prakartik Rabar kiska bahulak hai Isoprin ka 42. Maanav Nirmit prathan kritrim resha kya tha Nylon 43. Prithvi ki Aayu ka aanklan kis vidhi se kiya jata hai Uranium Denting vidhi se 44. Desh me kaling puraskar kab shuru hua 1952 me 45. Kashmir ka Akbar kise kaha jata hai Jainul Aabdin 46. Gramy Puraskar ka sambandh kis Shetr se hai Sangeet Shetr se 47. Lamp me prakash utpan karne ke liye kon si gas prayog ki jati hai Acitlin 48. Aayu nirdaharn me Carbon ke kis samsthanik ka upyog kiya jata hai C 14 49. Surya ke atyadhik taap ka kaaran kya hai Hydrogen ka nabhikiya salyan 50. Shahnama kiske dwara likha gya tha Firdawsi 51. Gautam Budhha ki patni ka kya naam tha Yashodhra 52. Duniya ka sabse jahrila janwar kon sa hai Arrow Frog 53. Kache Fal (Fruits) ko pakaane me kon si gas upyog me laayi jati hai Ethilin 54. Surya aur prithvi ke beech chandrma kab aata hai Surya grahan ke samay 55. Machhliyon ke yakrit tel me kis ki parchur matra hoti hai Vitamin – A 56. Vigyapan me prayukt rangeen visarjan naliyon me kon si gas paryog me laayi jati hai Ne 57. Manushya ke Jigar aur Maspeshiyon me sanchit Glaiclon kya hai Bahu-sharkra 58. Cement ka jamkar kathor hone ka kya kaaran hai Jal Yojan Aur Jal Apghatan 59. Kaanch kya hai Kaanch Akrishtliya thos ke roop me ek atishitit darv (liquid) hai 60. Shushk barf kya hoti hai Thos (solid) Carbon Di-Oxide 61. Kis desh me mahilayon ki jeevan partyasha sabse jyada hai Japan 62. Bharatiya Rashtriya calender ka sabse p


Sunday, 6 December 2015

Nothing Is Impossible...IAS Topper Ira Singhal – Success Story in Hindi IAS – UPSC Civil Services Exams! इसकी प्रतिष्ठा का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है, कि हर वर्ष लाखों विद्यार्थी IAS Officer बनने के लिए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा देते है, लेकिन मुश्किल से .025% विद्यार्थी ही IAS Officer बन पाते है| Civil Services Exams की Final Success Rate सामान्यत: .30% के करीब होती है जिसमें से भी सबसे प्रतिष्ठित Indian Administrative Services की Success Rate सामान्यत: .025% से भी कम होती है| लेकिन जिनके हौसले बुलंद होते है, वे मुश्किलों से डरते नहीं और सफलता को उनके आगे झुकना ही पड़ता| UPSC Civil Services Exam 2014 के नतीजे कुछ खास रहे क्योंकि पहले 4 स्थानों पर लड़कियों ने बाजी मारी और उसमें से भी पहले स्थान पर एक ऐसी लड़की सफल हुई, जिसका 60% शरीर विकलांग है| Ira Singhal ने UPSC Civil Service Exams 2014 में सर्वोच्च स्थान हासिल कर यह साबित कर दिया है कि मेहनत और बुलंद हौसलों के आगे विकलांगता बहुत कमजोर है| इरा सिंघल को अपनी विकलांगता के कारण कई मुसीबतों का सामना करना पड़ा लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी| इरा सिंघल ने 2010 में ही सिविल सेवा परीक्षा पास कर ली थी और वे Indian Revenue Service – IRS पद पर नियुक्ति की हकदार थी लेकिन शारीरिक रूप से विकलांग होने के कारण डिपार्टमेंट ने उनकी नियुक्ति पर रोक लगा दी| लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और उन्होंने Central Administrative Tribunal (CAT) में मामला दर्ज कराया | CAT का फैसला IRA Singhal के पक्ष में आया और उन्हें Assistant Commissioner of Customs and Central Excise Service (IRS) पर नियुक्त किया गया| कई मुसीबतों के बावजूद इरा सिंघल ने प्रयास जारी रख और फिर से सिविल सेवा की परीक्षा दी| उन्होंने 2014 Civil Service Exam में Top कर, फिर से यह साबित कर दिया कि भले ही वे शारीरिक रूप से थोड़ी कमजोर है लेकिन मानसिक रूप से वे बेहद शक्तिशाली है| इरा सिंघल महिलाओं, बच्चों और शारीरिक रूप से असक्षम लोगों के कल्याण के लिए कार्य करना चाहती है| आज हमें इरा सिंघल जैसे लोगों पर गर्व होता है, क्योंकि ऐसे लोग हर बार यह साबित कर देते है कि – नामुनकिन कुछ भी नहीं – Nothing is Impossible| Ira Singhal ने यह साबित किया है कि उनके बुलंद हौसलों के आगे मुसीबतें और विकलांगता बहुत कमजोर है|

Motivational storyएक बार की बात है किसी शहर में एक लड़का रहता था जो बहुत गरीब था। मेंहनत मजदूरी करके बड़ी मुश्किल से 2 वक्त का खाना जुटा पाता । . एक दिन वह किसी बड़ी कंपनी में चपरासी के लिए इंटरव्यू देने गया । बॉस ने उसे देखकर उसे काम दिलाने का भरोसा जताया । . जब बॉस ने पूछा -”तुम्हारी email id क्या है”? लड़के ने मासूमियत से कहा कि उसके पास email id नहीं है । . ये सुनकर बॉस ने उसे बड़ी घृणा दृष्टि से देखा और कहा कि आज दुनिया इतनी आगे निकल गयी है , और एक तुम हो कि email id तक नहीं है , मैं तुम्हें नौकरी पर नहीं रख सकता । . ये सुनकर लड़के के आत्मसम्मान को बहुत ठेस पहुंची,उसकी जेब में उस समय 50 रुपये थे । उसने उन 50 रुपयों से 1 किलो सेब खरीद कर वह अपने घर चलता बना। वह घर घर जाकर उन सेबों को बेचने लगा और ऐसा करके उसने 80 रुपये जमा कर लिए । . अब तो लड़का रोज सेब खरीदता और घर घर जाकर बेचता । सालों तक यही सिलसिला चलता रहा लड़के की कठिन मेहनत रंग लायी और एक दिन उसने खुद की कंपनी खोली जहाँ से विदेशों में सेब सप्लाई किये जाते थे । उसके बाद लड़के ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और जल्दी ही बहुत बड़े पैमाने पर अपना बिज़नेस फैला दिया और एक सड़क छाप लड़का बन गया अरबपति । . एक कुछ मीडिया वाले लड़के का इंटरव्यू लेने आये और अचानक किसी ने पूछ लिया – “सर आपकी emailid क्या है”?? . लड़के ने कहा -”नहीं है “, ये सुनकर सारे लोग चौंकने लगे कि एक अरबपति आदमी के पास एक “email id” तक नहीं है । . लड़के ने हंसकर जवाब दिया - ”मेरे पास email id नहीं है इसीलिए मैं अरबपति हूँ , अगर email id होती तो मैं आज एक चपरासी होता”। . मित्रों , इसीलिए कहा जाता है कि हर इंसान के अंदर कुछ ना कुछ खूबी जरूर होती है, भीड़ के पीछे भागना बंद करो और अपने टेलेंट और स्किल को पहचानो । . दूसरों से अपनी तुलना मत करो (Do not compare yourself to others) कि उसके पास वो है मेरे पास नहीं है , जो कुछ तुम्हारे पास है उसे लेकर आगे बढ़ो फिर दुनियां की कोई ताकत तुम्हें सफल होने से नहीं रोक सकती..।।


Every thing is good जानिए अपनी क्षमताओं को ..... ---------------------------- सबसे लोकप्रिय अभिनेताओं में से एक हैं - अमिताभ बच्चन जी. मित्रों अमिताभ जी ने वे सारे काम किये जो एक आम हिंदुस्तानी अपनी पूरी जिंदगी में करना चाहता है, "बिना उम्र का लिहाज किये हुए" - कहीं सफल तो कहीं असफल...... उनकी जिंदगी से अपने को correlate करें उम्र दर उम्र :- - पैदा होने पर (11-10-1942) उनके घर वालों ने पहले उनका नाम इंकलाब रखा, बाद में बदलकर अमिताभ किया। सार :- कई बार हमारे घर वाले भी हमारा नाम बदलते रहते है. - वो Engineer बनना चाहते थे और Indian Air Force join करना चाहते थे. सार :- स्कूल, कॉलेज में हर बच्चे का सपना बड़ा आदमी बनने का होता है. - उनके पास आर्ट्स में double मास्टर्स की डिग्री है. सार :- जब तक नौकरी नहीं लगती हम लोग भी Competitive Exam की तैयारी के साथ साथ कुछ न कुछ डिग्री लेते ही रहते हैं. - पढ़ाई पूरी करने के बाद, उन्होंने कोलकता की एक कंपनी में Executive और Freight Broker की नौकरी की. सार :- पढ़ाई पूरी करने के बाद और किसी Competitive Exam में न निकल पाने पर घर वालों के pressure में हमें भी अपनी मनपसंद नौकरी न मिलने पर Compromise करना पड़ता है. - उन्होंने सबसे पहले second hand कार खरीदी थी. सार :- सपने बड़े होते हैं पर पैसे भी एक मज़बूरी है, हकीकत का सामना करते हुए धीरे धीरे ही हम अपने सपने पूरे करने की कोशिश करते हैं. उम्र :- 27 साल - अभिनय में अपना कैरियर आजमाने के लिए उन्होंने वो नौकरी छोड़ दी और मुंबई आ गए। उन्होंने अपनी फिल्मों की शुरूआत 1969 में की। सार :- कहीं तो risk लेना ही पड़ता है बिना Result सोचे हुए. मित्रों एक बात ध्यान रहे " किसी नए काम का RISK न लेना ही जिंदगी का सबसे बड़ा RISK है." - ऐसा सुना है कि फिल्म उद्योग में प्रवेश करने से पहले, उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो में समाचार उद्घोषक, नामक पद हेतु नौकरी के लिए आवेदन किया जिसके लिए इन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया था। सार :- एक बार किसी चीज में नाकामी मिलने का मतलब ये नहीं की पूरी दुनिया ने हमें नकार दिया, प्रयास करते रहना चाहिए। - अपने संघर्ष के दिनों में उन्होंने कई रातें Marine Drive, Mumbai की bench में बिताई और कई वर्षों तक Actor, Director महमूद साहब के घर में रूके। सार :- संघर्ष के दिनों में ऐसा बहुत बार होता है, हमें ये नहीं सोचना चाहिए की हम इकलौते ही संघर्ष करते हैं. जो भी ऊंचाइयों पर पहुंचे हैं उन्होंने संघर्ष के दिन ऐसे ही काटे है, चाहे कोई भी field रही हो. उम्र :- 28 से 38 साल - कई लगातार फ्लॉप फिल्मों के बाद 1973 में उनकी पहली बड़ी सुपरहिट फिल्म "जंजीर" रही. 1970 से 1980 के दौर में उन्हें 'वन मैन इंडस्ट्री' तक करार दिया गया। सार :- सफलता रातों रात नहीं मिलती और मिलनी भी नहीं चाहिए। गलतियोँ से सीख सीख कर ही इंसान perfection की तरफ जाता है. उम्र :- 40 साल - 1982 को कुली फिल्म की शूटिंग के दौरान उन्हें गंभीर चोट लग गई। उनका काफी खून बह गया और उन्हें कई बोतल खून चढ़ा, उसमें से शायद कुछ infected खून भी उन्हें चढ़ गया जिसकी वजह से उनका लिवर सिर्फ 25% काम करता है (इसका Ad शायद हम सब लोग आजकल टीवी पर देख भी रहे हैं)। सार :- मित्रों जिंदगी में Problems तो आती ही रहेंगी, हम उन Problems को कैसे tackle करते है ये हमारे ऊपर निर्भर करता है. - इसी वक़्त वे अपने को मानसिक और शारीरिक दोनों रूप से कमजोर महसूस करने लगे. उनके मन में निराशावादी विचारधारा का जन्म हुआ और उन्होंने फिल्मों से सदा के लिए छुट्टी लेने का सोचा. सार :- जब Problems आती है तो नकारात्मकता आना स्वभाविक है, मित्रों बस यही समय है धैर्य रखने का और ये सोचने का की " ये वक़्त गुजर जायेगा". उम्र :- 42 साल - 1984 में उन्होंने राजनीति में शामिल होने का निर्णन किया और इलाहबाद से सांसद भी रहे। पर मात्र 3 साल के अंदर ही 1987 में उन्होंने राजनीति से संन्यास ले लिया. सार :- मित्रों जब हम एक काम में ज्यादा अच्छा नहीं कर पाते तो हमारे दिमाग में भी नए नए काम आते रहते हैं, राजनीति में आना किसको अच्छा नहीं लगता, पर अगर हम किसी चीज में आ भी गए और वो चीज हमें रास नहीं आ रही है तो हमें अपना रास्ता बदल लेना चाहिए, बजाय इसके की हम वहीं पर डटे रहें। उम्र :- 54 साल - इसके बाद वे निर्माता बने और उन्होंने 1996 में अमिताभ बच्चन कारपोरेशन लिमिटेड(ABCL) की स्थापना की। उन्होंने ABCL को वर्ष 2000 तक 1000 करोड़ रुपये वाली मनोरंजन, व्यावसायिक फ़िल्म उत्पादन, ऑडियो और वीडियो कैसेट डिस्क उत्पादन, टेलीविजन सॉफ्टवेयर और Event Management की एक प्रमुख कंपनी बनाने का सपना देखा। सार :- मित्रों फिर से वही बात " किसी नए काम का RISK न लेना ही जिंदगी का सबसे बड़ा RISK है". सपने देखना क